Sunday, March 6, 2011

भय का भूत -मुल्ला नसीरुद्दीन का दर्शन

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एक बार की बात है ,मुल्ला जी अपने यार दोस्तों के साथ फिलम का आखिरी शो देखने के बाद और चिलम गांजे केसुट्टे लगाने के बाद अफीम की पिनक में घर की तरफ़ जा रहे थे ...अपने में मगन मुल्ला फिलम का कोई गीतगुनगुनाते हुए जा रहे थे .."मुल्ला बदनाम हुआ फजीहत तेरे लिए " टाइप .....इतने में उन्हें लगा कि कोई उनकापीछा कर रहा है ..चौंक के इधर उधर देखा तो नीम अँधेरा .. हाथ को हाथ न सूझे ..सिहरन सी दौड गयी मुल्ला केपूरे शरीर में...

झींगुरों की आवाज़. कहीं कहीं मेंढकों की टर्राहट और अँधेरे में चमकते जुगनुओं की रोशनी में पेड़ों के साये.. बहुतभयावह लग रहे थे ...मुल्ला की टांगें कांपने लगीं ..तभी उनके कानो में कुछ आवाजें पड़ी... दिल की धडकन कोरोकने की नाकाम कोशिश करके मुल्ला ने कान लगा दिए उन आवाजों पर...ऐसा लग रहा था की २०-२५ लोगों काझुण्ड उनकी तरफ़ बढ़ा आ रहा है... आवाज़ के लहकने से अंदाज़ा लग रहा था कि सबने दारू चढाई हुई है... मुल्लाने आँखें गड़ा गड़ा के देखा .. अब तक मुल्ला की नज़रें इस अँधेरे की अभ्यस्त हो चली थी... मुल्ला से १५-२० हाथकी दूरी पर
कुछ लोग सर पे साफा बांधे हुए ..कुछ एक के हाथों में बन्दूक ..हँसी ठठ्ठा करते चले आ रहे हैं..मुल्ला जी ने तुरंतनिष्कर्ष निकाला ..भैया आज तो फँस गए तुम "डकैतों' के चंगुल में... डर के मारे मुल्ला के होश फाख्ता हो गए..

वैसे लुटे जाने लायक कोई वस्तु मुल्ला के पास नहीं थी.... यहाँ तक कि अचकन भी उधार की पहने हुए थे मुल्ला.. लेकिन डकैत तो डकैत ... न उनका धर्म न ईमान.. गोली से उड़ाते देर नहीं लगेगी ..मुल्ला को अपनी कमसिन बीवीऔर ५ अदद बच्चों का खयाल आया .. और आनन फानन में मुल्ला सड़क के किनारे बनी एक चारदीवारी कोफलांग गए ..उनको चारदीवारी फलांगते उस झुण्ड में से एक आदमी ने देखा... और उनकी झोला सी अचकन को नाजाने क्या समझ के उसकी भी घिघ्घी बंध गयी.. हकलाते हुए उसने अपने बाकी साथियों को बताया .. सभी हल्लामचाते हुए उस चारदीवारी को कूद गए ...एक के पास दियासलाई थी..उसने एक तीली जलाई तो पाया कि वो एककब्रिस्तान है ...

अपने को बहुत दिलेर कहने वालों की भी रीढ़ की हड्डी सुन्न होने लगी...मुल्ला को काटो तो खून नहीं ..आँख बंदकरके मुल्ला ने कुरान की आयतें पढ़ना शुरू कर दिया.... झुण्ड में सबने एक दूसरे को चुप रहने का इशारा कियाऔर कहा देखो..कोई मुसलमान है .... इतने में मुल्ला जी ने महावीर विक्रम बजरंगी... बोलना शुरू कर दिया ..झुण्डमें सभी ने एक दूसरे को देखा और बोले नहीं भाई ये तो हिंदू है... मुल्ला हमारे धर्म निरपेक्ष ..ऐसे बुरे समय में वैसेभी कोई रिस्क नहीं लेना चाहते थे ...उन्होंने नानक नाम जहाज है बुदबुदाना शुरू किया और अंत में ..ओ' जीससओ' मेरी ...पढते हुए.. सीने पर क्रॉस का चिन्ह भी बना लिया ..

ये सब सुन कर उस पूरे समूह में भय की लहर दौड गयी... उनको लगा कि आज तो कोई आत्मा भटक रही है यहाँआत्मा का कोई धर्म नहीं होता ..ऐसा सभी ने सुना था ) ..माचिस की तीलियां जला जला कर अब खतम होने कीओर थी... उधर हमारे मुल्ला जी भी अँधेरे में छुपने की कोशिश में थे कि अचानक एक ताज़ी खुदी कब्र में जा गिरे.. जिसमें अगले दिन सुबह ..उनके पड़ोसी लड्डन मियां के शरीर को दफनाया जाना था जिनका आज ही इन्तेकालहुआ था ...अब मुल्ला जी डर वर सब भूल गए और चिल्लाने लगे जोर जोर से.... बचाओ बचाओ!!....

तभी उस भीड़ में से भी एक शरीर धडाम से मुल्ला जी के ऊपर आके गिरा ..और वो उन्हें मरा हुआ शरीर समझचिल्लाने लगा ..अचानक मुल्ला जी बोले- अरे मियाँ जुम्मन...तुम यहाँ ?तुम तो कल्लन मियाँ की शादी में गए थेन बाराती बन कर !!!

जुम्मन भाई भी मुल्ला जी को पहचान गए .. बोले- वहीँ से तो लौट रिये हैं हम सब.... मुल्ला तुम यहाँ क्या कर रहेहो....

मुल्ला जी ने कहा ..भाई जो तुम कर रहे हो... तुम्हारे कारण मैं और मेरे कारण तुम इस कब्र में पड़े हैं.... !!!

मुल्ला जी ने बातों ही बातों में एक गूढ़ दार्शनिक रहस्य प्रस्तुत कर दिया था

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3 comments:

  1. bouth he aacha post hai aapka dear.. read kiya aacha lagaa .., keep it up
    happy women's day...Visit My Blog PLz..
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  2. बहुत अच्छी कहानी| धन्यवाद|

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  3. हेर्ह्ग्र्ह3ब्य्चेर बेउह्य्व्जे

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