Tuesday, September 25, 2018

बेगम का जन्मदिन उर्फ़ मुल्ला का रोमांस


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उम्र के साथ कुव्वत बदलती है, हालात भी बदलते हैं,,,,मगर इंसान की तमन्नाएँ नहीं बदलती. बदले भी कैसे....इल्मी कहते कहते थकते नहीं....काहे के बूढ़े हो गए,,,,बूढ़ा होना महज एक दिमागी ख़याल है.....हमें सोचों से हमेशा जवान बने रहना चाहिए. यही बात जब अंग्रेजी में कही जाय  तो और दमदार हो जाती है, जैसा कि अमूमन देखा जाता है.
कहा जाता है, " To be young means living state of mind."....और यही तो हुआ मुल्ला नसरुदीन के यहाँ कल ही.

मुल्ला नसरुदीन की बेगम साहिबा 'लाल बीबी'  की साल गिरह थी 2 अक्टूबर को. कहा करती है, लोग गा गा के बावळे हुए फिरते हैं, आज के दिन दो फूल खिले थे जिनसे महका हिन्दुस्तान." अरे भाई 2 अक्टूबर महज़ मोहनदास करमचन्द गांधी और लाल बहादुर शास्त्री का ही हैप्पी बर्थडे नहीं, इसी दिन यह लाल बेगम उर्फ़ लैला जान भी इस जमीन पर नमूदर हुई थी. सीनियर सिटीजन होने के बावज़ूद भी बच्चों की मानिंद बहुत एक्साईंटेड होती है हमारी लैला भाभी अपने हैप्पी बर्थडे के लिए.

हाँ तो किस्सा यह हुआ कि 1 अक्टूबर की रात,,,,घडी के दोनों कांटे जवान मोहब्बत करने वालों की तरह मिले, बारह बजे,,तारीख बदली,,,नसरुदीन ने लैला भाभी से कहा, "मुबारक हो बेगम साहिबां, साल गिरहा मुबारक हो".
मुल्ला का यह बोलना नेताजी याने मुलायम सिंह यादव स्टाइल में था.
'मुबाअक हो सा' गिरा' टाइप्स.

बेगम बोली, मियाँ आज सूखे सूखे मुबाअकबाद से काम नहीं चलने का...याद करो वो जमाना जब तुम मुझ से बड़ी मोहब्बत किया करते थे,,,,कभी उंगली,,,,,कभी कुछ,,,,,,ऐसा काटते थे,,,,,बड़ी लुत्फ़ वाली आह निकलती थी,,,नीले नीले निशान कायम हो जाते थे.

मुल्ला भी मूड में आ गया था. बोला बेगम नीले निशान पर याद आया.....अर्ज़ किया है :

"क्या क़यामत है कि आरिज़ उनके नीले पड़ गए,
हमने तो बोसा लिया था ख़्वाब में तस्वीर का !!"

शायरी के दौर ने जरा बेगम को और डिमांडिंग बना दिया.
करने लगी इसरार, मुल्ला आज मेरी सालगिरह है,,,आज तो तुम को मेरी उंगली काटनी ही होगी.

मुल्ला बोला, काहे रात ख़राब कर रही हो नींद आ रही है, सो जाना चाहिए. कल देखेंगे.

लैला बेगम को कल कहाँ, हियर एंड नाउ की थ्योरी सुनी हुई.
बोली ना आज और अभी.

मुल्ला को मज़बूरन हामी भरनी पड़ी. बिस्तर से उठा और वाशरूम की जानिब मुखातिब हुआ.

बेगम बैचैन,,,,पूछे,,,,मुल्ला कहाँ चल दिए,,,काटो ना.

नसरुदीन बोला, "बेगम ज़रा दांत तो ले आऊं."

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